Thursday, January 8, 2015



     

                            जौनपुर के विकास में रोड़ा बना राजनीति 

जौनपुर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर एवं लोकसभा क्षेत्र है। मध्यकाल में शर्की शासकों की राजधानी रहा जौनपुर वाराणसी से 58 किमी. दूर है।  गोमती और सई मुख्य पैतृक नदियों हैं। इनके अलावा, वरुण, पिली और मयुर आदि छोटी नदिया हैं। मिट्टी मुख्य रूप से रेतीले, चिकनी बलुई हैं। जौनपुर अक्सर बाढ़ की आपदा से प्रभावित रहता है |
इस शहर की स्थापना 14वीं शताब्दी में फिरोज तुगलक ने अपने चचेरे भाई सुल्तान मुहम्मद की याद में की थी। सुल्तान मुहम्मद का वास्तविक नाम जौना खां था। इसी कारण इस शहर का नाम जौनपुर रखा गया। 1394 के आसपास मलिक सरवर ने जौनपुर को शर्की साम्राज्य के रूप में स्थापित किया। शर्की शासक कला प्रेमी थे। उनके काल में यहां अनेक मकबरों, मस्जिदों और मदरसों का निर्माण किया गया। यह शहर मुस्लिम संस्कृति और शिक्षा के केन्द्र के रूप में भी जाना जाता है। यहां की अनेक खूबसूरत इमारतें अपने अतीत की कहानियां कहती प्रतीत होती हैं। वर्तमान में यह शहर चमेली के तेल, तम्बाकू की पत्तियों, इमरती और स्वीटमीट के लिए लिए प्रसिद्ध है।
शिराज़-ए-हिन्द कहे जाने वाले जौनपुर को आज गंदी राजनीती ने अपने चपेट में ले लिया है,
आज विकास के नाम पर बड़े बड़े राजनेता अपनी रोटी सेक रहे है,जिले में बड़े बड़े पोस्टर-बैनर तो दिखते है पर जमीनी हकीकत कुछ और ही बाया करती है आज जौनपुर की सडको में गड्ढ़े नहीं गड्ढ़े में जौनपुर है, आज जौनपुर में बिजली का संकट है,जौनपुर आज भी कई छोटे-बड़े मूलभूत समस्याओ और चीजों से वंचित है,जौनपुर की बदहाली का एक छोटा सा उदहारण वहाँ के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से लगया जा सकता है इस देश में कई ऐसे छोटे शहर है जहाँ लोग मल्टीप्लेक्स का लुफ्त उठा रहे है चुनाव के दौरान बड़े बड़े नेता अपनी किस्मत आजमाने जौनपुर आते और लोगो के साथ झूटे वायदे कर के चले जाते है.परन्तु 9 विधान सभा और 2 लोक सभा सीटो वाले जौनपुर सिर्फ इतिहास के पुराने पन्नो में सिमट कर रह गया है ये अपने हक और अधिकार के लिए तरस्ता तो जरुर है लेकिन अफ़सोस इस बात का है की कोई भी इसका सुद्ध तक लेने वाला नहीं है इसे या तो विडम्बना कहे या जौनपुर का दुर्भाग्य जो कभी ज्ञान का केंद्र हुआ करता था और आज के वर्तमान परिद्रीस्य में ये खुद अशिक्षा और बहुत से भौतिक संसाधनों की कमी से ग्रसित है| जिले के पिछडेपन का ताज़ा उदहारण देखने को तब मिलता है जब हमारे ही बच्चे बाहर जाकर अपने जौनपुर का नाम लेने से कतराते है |
जौनपुर में 2 मुख्य रेलवे स्टेशन हैं, 1. जौनपुर जंक्शन, 2. जौनपुर सिटी स्टेशन। लेकिन दोनों ही स्टेशनो में कोई भी विकास का कार्य नहीं हुआ आज भी दोनों स्टेशन में मूल सुविधा की कमी है |  जिले का आर्थिक विकास मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है,पर यहाँ के किसान पानी से वंचित है जौनपुर जिला की जनसंख्या के तीन चौथाई कृषि पर निर्भर है। आज जिले का शिक्षा इस्तर बदहाल है किसी समय में यहाँ से कई छात्र सरकारी नौकरी में चयनित होते थे मगर आज हालत बात से बतर हो गयी है | अगर यही आलम रहा तो आने वाले दिनों में जौनपुर का उपयोग सिर्फ वोट बैंक

राजनीति

के इस्तमाल के लिए ही किया जायेगा |

   ( राजन तिवारी)                                                     

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